Thursday, November 12, 2009

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी – बावरा मन

बावरा मन देखने चला एक सपना।।

बावरा मन देखने चला एक सपना।।

बावरा मन देखने चला एक सपना।।

बावरा मन देखने चला एक सपना।।

बावरे-से मन की देखो बावरी है बातें।।

बावरी-सी धड़कनें हैं बावरी है साँसें

बावरी-सी करवटों से निंदिया क्यों भागे

बावरे-से नैन चाहे बावरे झरोखों से

बावरे नज़ारों को तकना

बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरे-से इस जहाँ में बावरा इक साथ हो

इस सयानी भीड़ में बस हाथों में तेरा हाथ हो

बावरी-सी धुन हो कोई बावरा इक राग हो।।

बावरे-से पैर चाहें बावरे तरानों के

बावरे-से बोल पे थिरकना

बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरा-सा हो अँधेरा बावरी खामोशियाँ।।

थरथराती लौ हो मद्धम बावरी मदहोशियाँ

बावरा इक घुंघटा चाहे हौले हौले बिन बताए।।

बावरा-से मुखड़े से सरकना

बावरा मन देखने चला एक सपना।।

बावरा मन देखने चला एक सपना।।

बावरा मन देखने चला एक सपना।।

गायक स्वानंद किरकिरे

गीतकार पुष्पा पटेल

संगीत शांतनु मोइत्रा

Wednesday, September 30, 2009

पहली बार मोहब्बत की है - कमीने

थोड़े भीगे-भीगे से थोड़े नम हैं हम
कल से सोए-वोए भी तो कम हैं हम
दिल ने कैसी हरकत की है
पहली बार मोहब्बत की है
आखिरी बार मोहब्बत की है
पहली बार मोहब्बत की है,
आखिरी बार मोहब्बत की है,

आँखें डूबी-डूबी सुरमई मद्धम
झीलें पानी-पानी, बस तुम और हम
बात बढ़ी हैरत की है
पहली बार मोहब्बत की है
आखिरी बार मोहब्बत की है

ख़्वाब के बोझ से कपकपाती हुई
हलकी पलकें तेरी
याद आता है सब
तुझे गुदगुदाना, सताना, यूँ ही सोते हुए
गाल पे टीपना, मीचना, बेवजह बेसबब
याद है
पीपल के जिसके घने साए थे
हमने गिलहरी के जूठे मटर खाए थे
ये बरक़त उन हज़रत की है
पहली बार मोहब्बत की है
आखिरी बार मोहब्बत की है
पहली बार मोहब्बत की है
आखिरी बार मोहब्बत की है

गायक – मोहित चौहान
गीतकार – ग़ुलज़ार
संगीत – विशाल भरद्वाज

Tuesday, September 29, 2009

कमीने - कमीने

क्या करे ज़िंदगी इसको हम जो मिले
इसकी जां खा गए रात दिन के गिले

रात दिन गिले

मेरी आरज़ू कमीनी
मेरे ख़्वाब भी कमीने
इक दिल से दोस्ती थी
ये हुजू़र भी कमीने

क्या करे ज़िंदगी इसको हम जो मिले
इसकी जां खा गए रात दिन के गिले

कभी ज़िंदगी से मांगा पिंजरे में चाँद ला दो
कभी लालटेन देके कहा आसमाँ पे टांगो ।।
जीने के सब करीने
थे हमेशा से कमीने
कमीने कमीने कमीने कमीने

मेरी दास्तां कमीनी
मेरे रास्ते कमीने
इक दिल से दोस्ती थी
ये हुजू़र भी कमीने

जिसका भी चेहरा छीला अंदर से और निकला
मासूम-सा कबूतर नाचा तो मोर निकला
कभी हम कमीने निकले कभी दूसरे कमीने
कमीने कमीने कमीने कमीने

मेरी दोस्ती कमीनी
मेरे यार भी कमीने
इक दिल से दोस्ती थी
ये हुजू़र भी कमीने

गायक - विशाल भरद्वाज
गीतकार - ग़ुलज़ार
संगीत - विशाल भरद्वाज

Wednesday, March 18, 2009

जय हो - स्लमडॉग करोड़पति

जय हो जय हो जय हो जय हो
आजा आजा जिंद शामियाने के तले
आजा ज़री वाले नीले आसमान के तले
जय हो जय हो जय हो जय हो
आजा आजा जिंद शामियाने के तले
आजा ज़री वाले नीले आसमान के तले
जय हो जय हो जय हो जय हो

रत्ती रत्ती सच्ची मैंने जान गंवाई है
नच्च नच्च कोयलों पे रात बिताई है
अखियों की नींद मैंने फूँकों से उड़ा दी
गिन गिन तारे मैंने उंगली जलाई है
आजा आजा जिंद शामियाने के तले
आजा ज़री वाले नीले आसमान के तले
जय हो जय हो
जय हो जय हो

चख ले हो चख ले ये रात शहद है चख ले
रख ले हाँ दिल है दिल आखरी हद है रख ले
काला काला काजल तेरा कोई काला जादू है न
काला काला काजल तेरा कोई काला जादू है न

आजा आजा जिंद शामियाने के तले
आजा ज़री वाले नीले आसमान के तले
जय हो जय हो जय हो जय हो

कब से हाँ कब से जो लब पे रुकी है कह दे
कह दे हाँ कह दे अब आँख झुकी है कह दे
ऐसी ऐसी रोशन आँखें रोशन दोनो भी है है क्या
आजा आजा जिंद शामियाने के तले
आजा ज़री वाले नीले आसमान के तले
जय हो जय होजय हो जय हो

गायक - सुखविंदर, तन्वी शाह, महालक्ष्मी अय्यर, विजय प्रकाश
गीतकार - गुलज़ार
संगीत - ए आर रहमान

Tuesday, February 17, 2009

बाख़ुदा तुम्हीं हो - किस्मत क्नेक्शन

तुम ही एहसासों में तुम्हीं जज़्बातों में
तुम ही लम्हातों में तुम ही दिन रातों में


बाख़ुदा तु्म्हीं हो, हर जगह तुम्हीं हो
हाँ मैं देखूँ जहाँ जब उस जगह तुम्हीं हो
ये जहाँ तुम्हीं हो वो जहाँ तुम्हीं हो
इस ज़मीं से फ़लक के दरमियाँ तुम्हीं हो
तुम ही हो बेशुबा तुम ही हो
तुम ही हो मुझ में हाँ तुम ही हो
तुम ही हो

कैसे बताएं तुम्हें और किस तरह ये
कितना तुम्हें हम चाहते हैं
साया भी तेरा दिखे तो पास जाके
उस में सिमट हम जाते हैं
रास्ता तुम्हीं हो रहनुमा तुम्हीं हो
जिसकी ख़्वाहिश है हमको वो पनाह तुम्हीं हो
तुम ही हो बेशुबा तुम ही हो
तुम ही हो मुझ में हाँ तुम ही हो

तुम ही एहसासों में तुम्हीं जज़्बातों में
तुम ही लम्हातों में तुम ही दिन रातों में


कैसे बताएं तुम्हें शब में तुम्हारें ख़्वाब हसीं जो आते हैं
कैसे बताएं तुम्हें लम्स वो सारे जिस्म को जो महकाते हैं
इब्तिदा तुम्हीं हो, इंतेहा तुम्हीं हो
तुम हो जीने का मकसद और वजह तुम्हीं हो
बाख़ुदा तु्म्हीं हो,हर जगह तुम्हीं हो
हाँ मैं देखूँ जहाँ जब उस जगह तुम्हीं हो
ये जहाँ तुम्हीं हो, वो जहाँ तुम्हीं हो
इस ज़मीं से फ़लक के दरमियाँ तुम्हीं हो
तुम ही हो बेशुबा तुम ही हो
तुम ही हो मुझ में हाँ तुम ही हो
तुम ही हो
तुम ही हो

गायक - आतिफ़ असलम, अलका याज्ञिक
गीतकार - सैय्यद कादरी
संगीत - प्रीतम

Sunday, January 25, 2009

कैसे मुझे तुम मिल गईं - गजनी

कैसे मुझे तुम मिल गईं
किस्मत पे आए न यकीं
उतर आई झील में
जैसे चाँद उतरता है कभी
हौले हौले धीरे से

गुनगुनी धूप की तरह से तरन्नुम में तुम
छूके मुझे गुज़री हो यूँ
देखूँ तुम्हें या मैं सुनूँ
तुम हो सुकूँ तुम हो जुनूँ
क्यों पहले न आई तुम

कैसे मुझे तुम मिल गईं
किस्मत पे आए न यकीं

मैं तो ये सोचता था के आज कल
उपर वाले को फ़ुरसत नहीं
फिर भी तुम्हें बनाके वो
मेरी नज़र में चढ़ गया
रुतबे में वो और बढ़ गया

बदले रास्ते झरने और नदी
बदले रेत की टिम टिम
छेड़े ज़िंदगी धुन कोई नई
बदले बरखा की रिमझिम
बदलेंगी रितुएं अदा
पर मैं रहूँगी सदा उसी तरह
तेरी बाँहों में बाँहें डालके
हर लम्हा हर पल

ज़िंदगी सितार हो गई
रिमझिम मल्हार हो गई
मुझे आता नहीं किस्मत पे अपनी यकीं
कैसे मुझको मिली तुम

गायक – बैनी दयाल / श्रेया घोषाल
गीतकार – प्रसून जोशी
संगीत – ए आर रहमान

Wednesday, September 17, 2008

ये तुम्हारी मेरी बातें - Rock On!!

ये तुम्हारी मेरी बातें हमेशा यूँ ही चलती रहें
ये हमारी मुलाकातें हमेशा यूँ ही चलती रहें
बीते यूँ ही अपने सारे दिन रात
बातों से निकलते रही नई बात
फिर वही बातें लेके गीत कोई हम लिखें
जो दिल को हाँ सब के दिल को छू ले
बातें सुरों में यूँ ही पिघलती रहें
बातें गीतों में यूँ ही ढलती रहें

गीतों में हाँ हमको खुशियों से हम सजा दें
जो सुने वो कहे हमसे गाओ न
ये तुम्हारी मेरी बातें हमेशा यूँ ही चलती रहें
ये हमारी मुलाकातें हमेशा यूँ ही चलती रहें
बीते यूँ ही अपने सारे दिन रात
बातों से निकलते रही नई बात
फिर वही बातें लेके गीत कोई हम लिखें
जो दिल को हाँ सब के दिल को छू ले
बातें सुरों में यूँ ही पिघलती रहें
बातें गीतों में यूँ ही ढलती रहें

गायक – डोमिनीक केरेयो
गीतकार – जावेद अख़्तर
संगीत – शंकर, एहसान, लॉय

फिर देखिए - Rock On!!

आँखों में जिस के कोई तो ख़्वाब है
खुश है वही जो थोड़ा बेताब है
ज़िंदगी में कोई आरज़ू कीजिए
फिर देखिए...

होंठों पे जिसके कोई तो गीत है
वो हारे भी तो उस की ही जीत है
दिल में जो गीत है गुनगुना लीजिए
फिर देखिए...

यादों में जिस के किसी का नाम है
सपनों के जैसी उस की हर शाम है
कोई तो हो जिसे अपना दिल दीजिए
फिर देखिए...

ख़्वाब बुनिए ज़रा गीत सुनिए ज़रा फूल चुनिए ज़रा
फिर देखिए...

गायक - कारालिसा मोंटीरो
गीतकार - जावेद अख़्तर
संगीत - शंकर, एहसान, लॉय

Tuesday, September 16, 2008

पिछले सात दिनों में - Rock On!!

मेरी laundry का इक bill
इक आधी पढ़ी novel

इक लड़की का phone number
मेरे काम का इक paper

मेरे ताश से heart का king
मेरा इक चांदी का ring

पिछले सात दिनों में मैंने खोया
कभी ख़ुद पे हँसा मैं और कभी ख़ुद पे रोया

Present मिली इक घड़ी
प्यारी थी मुझे बड़ी

Mary-Jane का इक packet
मेरी denim की jacket

दो one-day match के passes
मेरे नए नए sunglasses

पिछले सात दिनों में मैंने खोया
कभी ख़ुद पे हँसा मैं और कभी ख़ुद पे रोया

कैसे भूलूँ सातवाँ जो दिन आया
किसी ने तुमसे इक party में मिलवाया
कैसा पल था जिस पल मैंने तुमको पहली बार देखा था
हम जो मिले पहली बार
मैंने जाना क्या है प्यार
मैंने होश भी खोया दिल भी खोया
कभी ख़ुद पे हँसा मैं और कभी ख़ुद पे रोया
मैंने पिछले सात दिनों में ये सब है खोया

मेरी laundry का इक bill
इक आधी पढ़ी novel

इक लड़की का phone number
मेरे काम का इक paper

मेरी laundry का इक bill
इक आधी पढ़ी novel

इक लड़की का phone number
मेरे काम का इक paper

हम जो मिले पहली बार
मैंने जाना क्या है प्यार
मैंने होश भी खोया दिल भी खोया
कभी ख़ुद पे हँसा मैं और कभी ख़ुद पे रोया
मैंने पिछले सात दिनों में ये सब है खोया

गायक – फ़रहान अख़्तर
गीतकार – जावेद अख़्तर
संगीत – शंकर, एहसान, लॉय

तुम हो तो - Rock On!!

तुम हो तो गाता है दिल
तुम नहीं तो गीत कहां
तुम हो तो है सब हासिल
तुम नहीं तो क्या है यहां
तुम हो तो है सपनों के जैसा हसीं इक समां
जो तुम हो तो लगता है कि मिल गई हर खुशी
जो तुम न हो तो लगता है कि हर ख़ुशी में है कमी
तुमको है मांगती ये ज़िंदगी

तुम हो तो राहें भी हैं
तुम नहीं तो रस्ते कहां
तुम हो तो यहां सब ही है
तुम नहीं तो कौन यहां
तुम हो तो है हर एक पल मेहरबां ये जहाँ
जो तुम हो तो हवा में भी महब्बतों का रंग है
जो तुम न हो तो फिर कोई न जोश न उमंग है
तुम मिले तो मिली ये ज़िंदगी


गायक – फ़रहान अख़्तर
गीतकार – जावेद अख़्तर
संगीत – शंकर, एहसान, लॉय