Friday, July 27, 2007

आँखों में रहते हैं - अनकही

आँखों में अंजाने रहते मंज़र कई
सीने में चुभती है कोई बेबसी नई
यादों में सजी कुछ बातें अनकही
इन बातों में कहीं खोई है ज़िंदगी
आँखों में अंजाने रहते मंज़र कई
सीने में चुभती है कोई बेबसी नई

दिल भूले नहीं क्यों बीते पल कोई यहां करे भी तो क्या
टूटे हैं अरमां सपने भी कैसे इन्हें सदा दूं मैं
यादों में सजी कुछ बातें अनकही
इन बातों में कहीं खोई है ज़िंदगी
आँखों में अंजाने रहते मंज़र कई
सीने में चुभती है कोई बेबसी नई

क्या ज़िंदगी है पूछो न लेती सदा नए इम्तिहां
ये इश्क भी है इक सज़ा कैसे तुझे बताऊँ मैं
यादों में सजी कुछ बातें अनकही
इन बातों में कहीं खोई है ज़िंदगी
आँखों में अंजाने रहते मंज़र कई
सीने में चुभती है कोई बेबसी नई


गायक – शान, कुणाल गांजावाला
गीतकार – समीर
संगीत - प्रीतम

Thursday, July 26, 2007

सूना सूना लम्हा लम्हा - कृष्णा कॉटेज

सूना सूना लम्हा लम्हा मेरी राहें तन्हा तन्हा
आकर मुझे तुम थाम लो मंज़िल तेरी देखे रस्ता
मुड़ के ज़रा अब देख लो ऐसा मिलन फिर हो न हो
सब कुछ मेरा तुम ही तो हो

बेपनाह प्यार है आजा
तेरा इंतज़ार है आजा ।।

सूना सूना लम्हा लम्हा मेरी राहें तन्हा तन्हा

बिछड़े भी हम जो कभी रास्तों में तो संग संग रहूंगी सदा
कदमों की आवाज़ सुनके चलूंगी तुम्हें ढूँढ लूंगी सदा
भूली मुहब्बत की ये ख़ुश्बुएं हैं हवाओं में फैली हुईं
छू कर मुझे आज महसूस कर लो है यादें मेरी अनछुई
ऐसा मिलन फिर हो न हो
सब कुछ मेरा तुम ही तो हो

बेपनाह प्यार है आजा
तेरा इंतज़ार है आजा ।।

सूना सूना लम्हा लम्हा मेरी राहें तन्हा तन्हा

मुड़ के ज़रा अब देख लो ऐसा मिलन फिर हो न हो
सब कुछ मेरा तुम ही तो हो

बेपनाह प्यार है आजा
तेरा इंतज़ार है आजा ।।

यादों के धागों में हम तुम बंधे हैं ज़रा डोर तुम थाम लो
बाहों में फिर से पिघल जाने दो मुझको फिर से मेरा नाम लो
मैं वो शमा हूँ जो रोशन तुम्हें करके ख़ुद तो पिघल जाऊँगी
सुबह का सूरज तुम्हारे लिए है मैं हूँ रात ढल जाऊँगी
ऐसा मिलन फिर हो न हो
सब कुछ मेरा तुम ही तो हो

बेपनाह प्यार है आजा
तेरा इंतज़ार है आजा ।।

सूना सूना लम्हा लम्हा मेरी राहें तन्हा तन्हा

मुड़ के ज़रा अब देख लो ऐसा मिलन फिर हो न हो
सब कुछ मेरा तुम ही तो हो

बेपनाह प्यार है आजा
तेरा इंतज़ार है आजा ।।


गायक – श्रेया घोषाल
गीतकार – नीलेश मिश्रा
संगीत – अनु मलिक

Sunday, June 10, 2007

अल्लाह के बन्दे - वैसा भी होता है पार्ट II

टूटा टूटा एक परिन्दा ऐसे टूटा कि फिर जुड़ न पाया
लूटा लूटा किसने उसको ऐसे लूटा कि फिर उड़ न पाया
गिरता हुआ वो आसमां से आकर गिरा ज़मीन पर
ख्वाबों में फिर भी बादल ही थे वो कहता रहा मगर के

अल्लाह के बन्दे हंस दे अल्लाह के बन्दे अल्लाह के बन्दे हंस दे
जो भी हो कल फिर आएगा
अल्लाह के बन्दे हंस दे अल्लाह के बन्दे अल्लाह के बन्दे हंस दे
जो भी हो कल फिर आएगा

खोके अपने पर ही तो उसने था उड़ना सीखा
गम को अपने साथ में ले ले दर्द भी तेरे काम आएगा
अल्लाह के बंन्दे हंस दे अल्लाह के बन्दे अल्लाह के बन्दे हंस दे
जो भी हो कल फिर आएगा
अल्लाह के बन्दे हंस दे अल्लाह के बन्दे अल्लाह के बन्दे हंस दे
जो भी हो कल फिर आएगा

टुकड़े टुकड़े हो गया था हर सपना जब वो टूटा
बिखरे टुकड़ों में अल्लाह की मर्ज़ी का मंज़र पाएगा
अल्लाह के बन्दे हंस दे अल्लाह के बन्दे अल्लाह के बन्दे हंस दे
जो भी हो कल फिर आएगा
अल्लाह के बन्दे हंस दे अल्लाह के बन्दे अल्लाह के बन्दे हंस दे
जो भी हो कल फिर आएगा

गायक – कैलाश खेर

Wednesday, June 6, 2007

मैंने दिल से कहा - रोग

मैंने दिल से कहा ढूँढ लाना ख़ुशी
नासमझ लाया ग़म तो ये ग़म ही सही

बेचारा कहां जानता है ख़लिश है ये क्या ख़ला है
शहर भर की खुशी से ये दर्द मेरा भला है
जश्न ये रास ने आए मज़ा तो बस ग़म में आए

कभी है इश़्क का उजाला कभी है मौत का अंधेरा
बताओ कौन भेस होगा मैं जोगी बनूं या लुटेरा
कई चेहरे हैं इस दिल के न जाने कौन सा मेरा

हज़ारों ऐसे फासले थे जो तय करने चले थे
राहें मगर चल पड़ी थीं और पीछे हम रह गए थे
कदम दो चार चल पाएं किए फेरे तेरे मन के

गायक – के के
गीतकार – नीलेश मिश्रा
संगीत – एम एम करीम

Monday, June 4, 2007

जागे हैं - गुरू

जागे हैं देर तक हमें कुछ देर सोने दो
थोड़ी सी रात और है सुबह तो होने दो
आधे-अधूरे ख़्वाब जो पूरे न हो सके
इक बार फिर से नींद में वो ख़्वाब बोने दो


गायक – चित्रा, ए आर रहमान
गीतकार – ग़ुलज़ार
संगीत – ए आर रहमान

Tuesday, May 15, 2007

तेरे बिन - बस एक पल

तेरे बिन मैं यूं कैसे जिया कैसे जिया तेरा बिन
तेरे बिन मैं यूं कैसे जिया कैसे जिया तेरा बिन

लेकर यादें तेरी रातें मेरी कटीं
मुझसे बातें तेरी करती है चाँदनी
तन्हा तुझ बिन रातें मेरी दिन मेरे दिन के जैसे नहीं
तन्हा बदन तन्हा है रूह नम मेरी आँखें रहें
आजा मेरे अब रू ब रू जीना नहीं बिन तेरे
तेरे बिन मैं यूं कैसे जिया कैसे जिया तेरा बिन

कब से आँखें मेरी राह में तेरे बिछीं
भूले से भी कभी तू मिल जाए कहीं
भूले न मुझसे बातें तेरी भीगी हर हर पल आँखें मेरी
क्यूं सासं लू क्यूं मैं जीऊं जीना बुरा सा लगे
क्यूं हो गया तू बेवफा मुझको बता दे वजह

बस एक पल - बस एक पल

बस एक पल बस एक पल बस एक पल
बस एक पल बस एक पल बस एक पल

तू इक बार जो प्यार से मुझको छूले तो हर ज़ख़्म भर जाएगा
ज़रा इल्तिजा सुनके दीवाने दिल की मुझे अपने दिल से लगा
तेरे प्यार में ऐसे जीए हम
जला है ये दिल ये आँखें हुईं नम

हमारे ख़्यालों में ख़्वाबों में यादों में बातों में रहते हो तुम
बढ़ाके मैं ये हाथ छूना जो चाहूँ तो पल भर में होते हो ग़ुम
तेरे प्यार में ऐसे जीए हम
जला है ये दिल ये आँखें हुईं नम

सुना है मुहब्बत की तकदीर में लिखें हैं अँधेरे घने
तभी आज शायद सितारे सभी ज़रा सा ही रोशन हुए
तेरे हाथ की इन लकीरों में लिखे अभी और कितने सितम
ख़फ़ा हो गई है खुशी वक्त से हो रहे हैं मेहरबान हम
तेरे प्यार में ऐसे जीए हम
जला है ये दिल ये आँखें हुईं नम

Sunday, April 15, 2007

बंदे - ब्लैक फ़्राइडे

अरे रुक जा
अरे थम जा

अरे रुक जा रे बंदे
अरे थम जा रे बंदे
कि क़ुदरत हंस पड़ेगी ।।

अरे नींदें हे ज़ख़्मी
अरे सपने हैं भूखे
कि करवट फट पड़ेगी

अरे रुक जा रे बंदे
अरे थम जा रे बंदे
कि क़ुदरत हंस पड़ेगी ।।

अरे मंदिर ये चुप है
अरे मस्जिद है गुमसुम
इबादत थक पड़ेगी
समय की लाल आँधी
कब्रिस्तां के रस्ते
अरे लथपथ चलेगी

किसे काफ़िर कहेगा
किसे कायर कहेगा
तेरी कब तक चलेगी ।।

अरे रुक जा रे बंदे
अरे थम जा रे बंदे
कि क़ुदरत हंस पड़ेगी ।।

अरे मंदिर ये चुप है
अरे मस्जिद है गुमसुम
इबादत थक पड़ेगी
समय की लाल आँधी
कब्रिस्तां के रस्ते
अरे लथपथ चलेगी

अरे रुक जा रे बंदे
अरे थम जा रे बंदे
कि क़ुदरत हंस पड़ेगी

अरे नींदें हे ज़ख़्मी
अरे सपने हैं भूखे
कि करवट फट पड़ेगी

ये अँधी चोट तेरी
कभी की सूख जाती
मगर अब पक चलेगी

गायक – इंडियन ओशन
संगीत – इंडियन ओशन
गीतकार – पीयूष मिश्रा

नाम अदा लिखना - यहाँ

पूछे जो कोई मेरी निशानी रंग हिना लिखना
गोरे बदन पे उंगली से मेरा नाम अदा लिखना
कभी कभी आस पास चाँद रहता है
कभी कभी आस पास शाम रहती है
आओ न आओ न जेहलम में बह लेंगे
वादी के मौसम भी इक दिन तो बदलेंगे
कभी कभी आस पास चाँद रहता है
कभी कभी आस पास शाम रहती है

आऊं तो सुबह जाऊं तो मेरा नाम सबा लिखना
बर्फ़ पड़े तो बर्फ़ पे मेरा नाम तू आ लिखना
ज़रा ज़रा आग वाग पास रहती है
ज़रा ज़रा कांगड़ी की आँच रहती है
कभी कभी आस पास चाँद रहता है
कभी कभी आस पास शाम रहती है
(fade in) शामें बुझाते आती है रातें
रातें बुझाने तुम आ गए हो

जब तुम हँसते हो दिन हो जाता है
तुम गले लगो तो फिर सो जाता है

डोली उठाए आएगा दिन तो पास बिठा लेना
कल जो मिले तो माथे पे मेरे सूरज उगा देना
ज़रा ज़रा आस पास पास धूप रहेगी
ज़रा ज़रा आस पास रंग रहेंगे
ज़रा ज़रा आस पास पास धूप रहेगी
ज़रा ज़रा आस पास रंग रहेंगे

पूछे जो कोई मेरी निशानी रंग हिना लिखना
गोरे बदन पे उंगली से मेरा नाम अदा लिखना
कभी कभी आस पास चाँद रहता है
कभी कभी आस पास शाम रहती है

गायक – श्रेया घोषाल, शान
संगीतकार – शांतनु मोइत्रा
गीतकार – ग़ुलज़ार

Monday, April 2, 2007

सबसे पीछे हम खड़े - Let's Enjoy

ज़रा नज़र उठा के देखो बैठे हैं हम यहीं
बेख़बर मुझसे क्यों हो इतने बुरे भी हम नहीं

ज़माने की बातों में उलझो न है ये आसान जाने न
खुद से जो अगर तुम पूछो हैं हम तुम्हारे के नहीं
तेरी आँखों का जादू पूरी दुनिया पे है
दुनिया की इस भीड़ में सबसे पीछे हम खड़े

महफिलें आईं और गईं लोग आए और गए
तुम जो आज आए हो दिल में हो बस गए
मुस्कुरा के बात टालो न फिर मिलोगे जो कहीं
देखना यही कहोगो इतने बुरे थे हम नहीं
तेरी आँखों का जादू पूरी दुनिया पे है
दुनिया की इस भीड़ में सबसे पीछे हम खड़े

तेरी आँखों का जादू पूरी दुनिया पे है
दुनिया की इस भीड़ में सबसे पीछे हम खड़े

गायक: अंकुर तिवारी
मूल गायक: मोहित (सिल्क रूट)